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चम्बा का इतिहास

बहुत समय पहले की बात है, एक राजा हुआ करता था जिसका नाम राजा मारु था। वह लगभग ५०० अ०ड० (500AD) में चम्बा जिला के भरमोर नामक क्षेत्र में शासन करता था। राजा मारु के बाद राजा साहिल वरमन ने चम्बा मे शासन करना शुरु किया ओर उसने भरमोर से राजधानी को चम्बा शहर मे स्थानान्तरित कर दिया। उसकी एक बेटी थी जिसका नाम चम्पावती था। उसी के नाम पर शहर का नाम पड़ा। 500 AD से सन 1948 तक चम्बा में कुल 67 राजाओं ने शासन किया है। इसके अतिरिक्त, चम्बा पर अंग्रेजों ने भी शासन किया जोकि लगभग 98 सालों तक चला, सन 1946 से 1948 तक।चम्बा शहर में बहुत से धार्मिक स्थल व मन्दिर पाए जाते हैं। यहाँ पर कुछ त्योहार तो ऐसे हैं, जो केवल चम्बा में ही मनाए जाते हैं, जैसे- मिन्जर का मेला, सूही का मेला इत्यादि। यह त्योहार कई दिनों तक चलते हैं (४ से ७ दिन)। चम्बा में बहुत से कलाकार पाए जाते हैं। चम्बा का रुमाल, चम्बा की चप्पल, चम्बा की चुख (मिर्ची का आचार) इत्यादि यहाँ की कुछ प्रसिद्ध वस्तुओं में से हैं।

चम्बा एक छोटा सा गाँव है, जिस ने अपने इतिहास में कई प्रकार के छोटे-बड़े उतार चढ़ाव देखे हैं। बहुत से राजाओं ने यहाँ साशन किया, कई तरह के परिवर्तन भी किए। लेकिन फिर भी चम्बा ने इन सभी बदलावों में भी अपनी गुणवत्ता, पवित्रता व पहचान को कायम रखा हुआ है। शायद यही इसकी खासियत है, जिसके बल पर यह प्रदेश में अपनी गरिमा बनाए हुए है। हर साल इस छोटी सी जगह हो देखने के लिए लाखों लोग देश-विदेश से आते हैं और इसकी यादों को अपने कैमरा में बंद कर के अपने साथ ले जाते हैं।